ग्राम पंचायत छरछेद में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया हलषष्ठी पर्व, माताओं ने संतानों की लंबी उम्र के लिए रखा निर्जला व्रत

चंदन जायसवाल

कसडोल।ग्राम पंचायत छरछेद में भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि पर हलषष्ठी (कमरछठ) का पावन पर्व पारंपरिक आस्था, श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। गांव की माताओं ने अपनी संतानों की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना करते हुए दिनभर निर्जला उपवास रखा और पूरे विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की।
पर्व के अवसर पर गांव के विभिन्न पारा-मोहल्लों में महिलाओं ने सामूहिक रूप से सगरी (छोटा जलकुंड) का निर्माण किया। सगरी के चारों ओर बेर, महुआ, पलाश की डालियों और कांस के फूलों से आकर्षक वेदी सजाई गई। पूजा स्थल पर एकत्र होकर महिलाओं ने कमरछठ की पारंपरिक छह कथाएं सुनीं और भगवान शिव-पार्वती सहित हलधर बलराम की आराधना की। पूजा संपन्न होने के बाद माताओं ने कांस व नए कपड़े से बने ‘पोता’ से बच्चों की पीठ पर थपकी देकर उन्हें दीर्घायु और निरोगी जीवन का आशीर्वाद दिया।
इस व्रत की विशेष परंपरा के अनुसार महिलाओं ने हल से जुते खेतों के अन्न का पूर्ण त्याग किया। पूजा और फलाहार के लिए बिना जुताई के उगने वाले पसहर (तिन्नी) चावल तथा मखना, कर्मत्ता, पोई, चेच व मुनगा जैसी छह प्रकार की मौसमी भाजियों का उपयोग किया गया। इसके साथ ही गाय के दूध-घी का उपयोग वर्जित रखकर केवल भैंस के दूध, दही और घी से नैवेद्य तैयार किया गया। अंत में महुआ के पत्तों से बने दोने-पत्तल में पसहर चावल और भाजियों का पारण कर माताओं ने व्रत पूरा किया। दिनभर पूरे गांव में भक्ति और उत्सव का माहौल बना रहा।

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